जुमा की नमाज छोड़ मदरसा शिक्षक जनसभा में पहुंचे।
जुमा की नमाज छोड़ मदरसा शिक्षक जनसभा में पहुंचे।
●पांचो वक्त की नमाज पढ़ने की बात कहते हैं वही जुमा की फ़र्ज़ नमाज छोड़ बैठे।
●सभी राज्यानुदानित मदरसों के प्रधानाचार्यों को निर्देश दिए थे।
●वे नौकरी बचाने के चक्कर में 12 बजे से पहले ही एकत्र होने लगे।
●एक बजे जनसभा स्थल पर पहुंच गए। यहां प्रधानमंत्री का भाषण सुनने के बाद शाम को चार बजे लौटे।
●जो मौलाना लोगों को शरीयत का पाठ पढ़ाते हैं । दींन की तालीम देते हैं।
कानपुर:प्रधानमंत्री की जनसभा में शामिल होने के लिए मदरसा शिक्षकों ने जुमा की नमाज छोड़ दी। प्रधानमंत्री की जनसभा में पहुंचने के फरमान के आगे उनको जुमा की फर्ज नमाज की भी फिक्र नहीं रही। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने जुमा को हुई सीएसए मैदान में हुई जनसभा में पहुंचने के लिए सभी राज्यानुदानित मदरसों के प्रधानाचार्यों को निर्देश दिए थे। उनसे कहा गया गया था कि मदरसा शिक्षकों व छात्रों के साथ वे एक बजे जनसभा स्थल पर पहुंच जाए। यही समय जुमा की नमाज का भी होता है। सरकारी नौकरी कर रहे इन शिक्षकों को अपनी नौकरी बचाने के लिए जुमा की नमाज छूटने की भी परवाह नहीं रही। वे नौकरी बचाने के चक्कर में 12 बजे से पहले ही एकत्र होने लगे। एक बजे जनसभा स्थल पर पहुंच गए। यहां प्रधानमंत्री का भाषण सुनने के बाद शाम को चार बजे लौटे। जनसभा में शिरककत के दौरान जुमा की नमाज का वक्त भी खत्म हो चुका था। सरकारी प्रमाण के आगे मदरसा शिक्षक बेबस दिखाई दिए उनको यह कहा गया था कि मौके पर पहुंचकर अपनी स्थिति से भी अवगत कराए।सभी मौलाना ने इसके लिए सेल्फी खींचकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी शेयर की। मौलानाओं के इस कार्य को लेकर तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं ।लोग कह रहे हैं की सरकारी नौकरी के आगे उनके लिए नमाज की भी कोई अहमियतनहीं है । जो मौलाना लोगों को शरीयत का पाठ पढ़ाते हैं । दीन की तालीम देते हैं। पांचो वक्त की नमाज पढ़ने की बात कहते हैं वही जुमा की फ़र्ज़ नमाज छोड़ बैठे।
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